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अपनी जानकारी और विधाओं को कभी भी कम करके  मत आंकिये 
सन १९९७८ - ९८ की बात होगी जब मैंने खाद्य प्रसंस्करण के सम्बन्ध में पढ़ना और उस पर सोचना शुरू किया तब मेरी बहुत सी बातों पर मित्र और परिवार वाले हंसा करते थे जैसे जब मैं कहता कि एक दिन लहसून और अदरक का पेस्ट मिलेगा जिसे जब मर्जी उपयोग में ला सकते हैं, ऐसे ही डिब्बा बंद सब्जियां, समोसे, बड़े और पराठे।  फिर समय बीत गया और हम सबने खाद्य प्रसंस्करण के अनेक स्वादिष्ट नमूने देखे। खाद्य प्रसंस्करण की तकनीक का हमारे देश और राज्य से बहुत पुराना नाता है  परन्तु पेशेवर और व्यावसायिक सोच की कमी के कारण हमने अपने धरोहरों को स्वान्तः सुखाय ही उपयोग किया वहीँ दूसरी और विदेशी कंपनियों ने हमारी सोच और जीवन शैली का अध्ययन कर खूब व्यवसाय किया फिर चाहे वो ईस्ट इंडिया कंपनी हो या फिर कोई और सभी बड़ी विदेशी कम्पनियों ने भारत को एक समृद्ध उपभोक्ता बाजार के रूप में देखा और व्यापार किया है।  हमारे देश में आज भी इतनी पुरातन तकनीक और बौद्धिक सम्पदा है कि व्यवस्थित और चरणबद्ध ढंग से कार्य करने पर देश से आधी बेरोजगारी तो यूँ ही मिट सकती है।  जरुरत है सिर्फ अवसर को …
सुचना शक्ति को पहचानें युवा
कहते हैं जंग की तैयारी वर्षों तक करनी पड़ती है ताकि वक्त आने पर कोई भी चूक न हो उसी प्रकार स्वरोजगार के लिए तैयारी हर युवा को हाई स्कूल परीक्षा पास करते ही शुरू कर देनी चाहिए। भविष्य की अपार संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अपनी युवा शक्ति के लिए विभिन्न  योजनाएं बनायीं हैं और अधिक से  को स्वरोजगार तथा रोजगार उपलब्ध करने के ध्येय से निरंतर प्रयास कर रही है। युवाओं को इसका अधिक से अधिक लाभ लेना चाहिए। प्रारम्भिक तैयारी के रूप में सरकार (केंद्र तथा राज्य) की योजनाओं के सम्बन्ध में नियमित रूप से अध्ययन करना चाहिए जिस से वक़्त आने पर अपनी जरुरी अर्हताओं एवं आवश्यकता के अनुसार विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाली वित्तीय सहायता के लिए आवेदन कर सकें।   एक सफल उद्यमी बनने के लिए कोई भी एक फार्मूला नहीं होता, इसके लिए हमें सतत प्रयास एवं तैयारी करनी पड़ती है। आमतौर पर यह देखा गया है कि युवाओं को आवश्यक अर्हताओं के बाद भी शासन की योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत पेश आती है जिसका प्रमुख कारण आवश्यक दस्तावेजों का अभाव होता है जैसे पैन कार्ड, आधार कार्ड, इनकम टैक्स…
समय तथा तनाव प्रबंधन वर्तमान समय में हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले दो मुख्य कारण हैं पहला तनाव तथा दूसरा समय का अकुशलतापूर्वक प्रबंधन। ये दोनों ही कारण एक दूसरे के पूरक हैं।  जब हम अपना कार्य तय समय सीमा में नहीं कर पाते तो तनाव उत्पन्न होता है और तनाव हमारे सोचने समझने की सहज क्षमता को प्रभावित करता है जिससे अनिर्णय की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और समय बीतते जाता है। दूसरे शब्दों में कहा जाय तो हम  सही समय पर अपनी प्राथमिकताएं तय नहीं कर पाते और वास्तविक लक्ष्य से भटक जाते हैं। हमारे आस पास न जाने कितने ऐसे लोग हैं जो बहुत से कार्य करने में सक्षम हैं तथा अपेक्षाकृत अधिक सफलता के साथ अपना  जीवन जी सकते हैं, परन्तु तात्कालिक सुविधा में उलझकर अथवा दूरदृष्टि न होने के कारण हताशा एवं असफलता के कुचक्र में फंसते चले जाते हैं।  ऐसी स्थिति में जब सभी धागे उलझ जाएँ तब शांति से बैठकर धैर्य के साथ अपनी प्राथमिकताएं तय करते हुए एक एक सिरे से समस्या की छोर पकड़ना ज्यादा आसान होता है और तभी आप उलझन को सुलझा सकते हैं।  बिना साहस गंवाए धीरज के साथ अपने बड़े लक्ष्य की ओर धीरे धीरे कदम बढ़ाना ही एकमात्र…
"Crowdfunding"
स्वरोजगार के लिए पूंजी की व्यवस्था  पिछले भाग में हमने अपने स्वरोजगार के चयन के लिए कुछ उपायों के बारे में चर्चा की थी।  आज हम स्वरोजगार स्थापित करने से पूर्व पूंजी की व्यवस्था पर चर्चा करेंगे।  सामान्य रूप से किसी भी व्यापार  व्यवसाय की योजना उसके आवश्यक लागत की चर्चा और चिंता से शुरू होती है।  कोई भी उद्यमी जब अपने व्यापार एवं व्यवसाय की परिकल्पना को आकार देने की सोचता है तब बहुत सारी  तकनीकि  समस्याएं मष्तिष्क में आने लगती है जैसे व्यापार की स्थापना के लिए एक अच्छी व्यापार योजना एवं प्रारूप, बाजार का शोध एवं विश्लेषण, उत्पाद का चयन, ग्राहक वर्ग का निर्धारण आदि। परन्तु इस सबसे ऊपर जो समस्या होती है वह होती है पूंजी की।  सामान्य रूप से व्यापार व्यवसाय की स्थापना के लिए अधिकांश लोग परंपरागत तरीके से ही पूंजी जुटाना चाहते हैं जैसे बैंक से व्यावसायिक लोन लेना या एंजेल इन्वेस्टर्स तथा वेंचर कैपिटल फर्म्स की मदद से पूंजी निवेश करना। इस तरह नए व्यापार में पूंजी लगाने के सीमित साधन हैं। इन सभी उपायों से इतर आज हम बात करेंगे "Crowdfunding " या जन सहयोग  की।�…
कैसे करें स्वयं के व्यवसाय की तैयारी - भाग एक  बढ़ती बेरोजगारी और महंगी होती गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ने मध्यम  वर्गीय परिवारों को एक चिरस्थाई घोर हताशा में ला खड़ा किया है। सरकार की विभिन्न योजनाओं और उनके क्रियान्वयन की जटिल प्रक्रियाओं ने जरूरतमंदों को ऐसे दोरस्ते पर ला खड़ा किया है जहाँ से या तो उन्हें सिर्फ काम चलाऊ अस्थाई रोजगार से काम चलाना पड़ता है या फिर ऐसे रास्तों पर चलने की मज़बूरी होती है जहाँ भविष्य को भुलाकर एक एक दिन काटने पड़ते हैं। ऐसे में हम सबका दायित्व बनता है की हम इस भीषण विपत्तिकाल में हमारे युवाओं की मदद करें।  हर युवा के लिए ये संभव नहीं है कि वह स्वयं का व्यापार करे और यदि व्यापार शुरू कर ही लिया हो तो उसे आगे बढ़ा सके।  भारत में नए उद्योग स्थापना एवं उसके स्थायित्व का आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला और निराशाजनक है।  

बहरहाल निराशाओं के चाहे लाख कारण हों पर कहावत है कि "हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम" इसलिए इस समस्या पर थोड़ा मंथन करते हैं और कोशिश करते है कि रास्ता सहज और सुगम हो परन्तु बिना मेहनत और लगन के कुछ नहीं होने वाला।  तो आइये देखते हैं कि क्या है समाधान?

जब भ…
पांच बातें और वर्तमान सन्दर्भ
आज चारों और असंतुष्टि का आलम है। रिस्तेदारी, दोस्ती, कार्यस्थल और,सोशल मीडिया सभी जगह एक चीज है जो सामान रूप से विद्यमान है वो है असंतुष्टि। सभी असंतुष्ट है, अंदर से गुस्से में हैं कि कहाँ मौका मिले तो अपना गुस्सा दे मारें। लोगों के बीच वैचारिक भिन्नता और संवादहीनता से ऐसी विस्फोटक स्थिति बन रही है की लगता है समाज का हर आदमी दूसरे पर शक कर रहा है। इस मानसिक अवस्था के बारे में विचार करने पर मुझे जो समझ आया वह ये था कि दरअसल हम अपना काम ठीक से नहीं करते, हमारी प्राथमिकताएं तय नहीं करते, समय सीमा तय नहीं करते, ईमानदार सोच नहीं रखते। अनुशासन और आत्ममंथन का तो कोई अर्थ ही नहीं रहा। बहरहाल अपने पहले पोस्ट में मैंने इस विषय को इसलिए चुना क्योंकि मुझे लगता है अधिकांश लोगों को ये समस्या परेशान कर रही होगी, कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में। तो आइये शुरू करते हैं ...... "प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करते हुए हमने जीवन के सभी सफलता सूत्र सहजता से पढ़ लिए थे, परन्तु कालांतर में आधुनिकीकरण की दौड़ में हमने उन सहज सरल बातों को भुला दिया और अब मोटी रकम फीस के रूप में चुका…