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"स्वरोजगार एवं महिलाएं"  "एक अनुमान (सरकारी आंकड़े नहीं हैं) के मुताबिक यदि 50 प्रतिशत ग्रामीण महिलाओं को रोजगार अथवा स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हों तो हमारे देश में गरीबी को २० से २५ प्रतिशत तक कम किया जा सकता है"।
केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा समय समय पर महिलाओं के सशक्तिकरण (रोजगार, स्वास्थ्य, सुरक्षा आदि ) के लिए विभिन्न योजनायें बनाई जाती हैं परन्तु आमतौर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जागरूकता के अभाव कारण महिलाओं को इन योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पता। हमारा प्रयास है कि सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक ऐसे अवसरों की जानकारी पहुचायें जिससे अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके। इसी श्रृंखला में महिलाओं के लिए ई- रिक्शा संचालन हेतु "छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल द्वारा संचालित मुख्यमंत्री ई - रिक्शा सहायता  योजना" के सम्बन्ध में  संक्षिप्त जानकारी लेख के अंत में संलग्न है। 
"वर्तमान में महिलाएं (विश्व भर में) सभी क्षेत्रों में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं और कुछ जगहों पर (समाज के कुछ हिस्स…
भारतीय उद्योग एवं व्यापार में कौशल अंतराल (SKILL GAP): एक विश्लेषण   


भारतीय औद्योगिक परिदृश्य में हमेशा से तकनिकी कुशल एवं दक्ष मानव संसाधनों की कमी रही है। भारतीय निर्माण क्षेत्र में यह स्किल गैप एक तरह की राष्ट्रीय समस्या  बन गया है जिसे ख़त्म करना अथवा इसके अंतर को कम करना राष्ट्रीय  प्राथमिकता बन गया है। इस स्किल गैप का सबसे ज्यादा खामियाजा  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है।  एक ओर जहाँ कुछउद्योगवास्तविक स्किल गैप (कौशलअंतराल ) से जूझ रहे हैं वहीँ अन्य उद्योगवाणिज्यिककठिनाइयोंसेपीड़ितहैं जिन्हेंकौशलविकासकार्यक्रमोंकेअलावाअन्यनीतियोंकेमाध्यमसेबेहतरढंगसेसंयोजित कियाजासकता है। कहने का तात्पर्य यह है किभारतके स्किल गैप (कौशलअंतराल)परसार्वजनिकबहस की आवश्यकता है जिससे इस सन्दर्भ में नीति बनाई जा सके। भारतमें स्किल गैप (कौशलअंतराल) को कम करने या ख़त्म करनेके लिए सरकार तथा शीर्ष औद्योगिक संगठनों द्वारा समय समय पर काफीकुछप्रयास किया जाता रहा है जिनमें जागरूकता कार्यक्रम, स्किल गैप एनालिसिस सर्वे, तकनिकी कौशल विकास कार्यक्रम आदि हैं  इस दौरान सरकारऔरकुछउद्योग संगठनों नेयह पा…
उद्यमिता बनाम स्टार्टअप

आज जब देश में स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया का माहौल है युवाओं के समक्ष एक दुविधा सी है उद्यमिता या स्टार्टअप।  एक ओर उद्यमिता विकास कार्यक्रम जोरों पर है, स्वरोजगार स्थापना के लिए सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं दूसरी ओर स्टार्टअप आइडियाज के लिए सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।  शिक्षित एवं बेरोजगार युवाओं के सामने कुछ धुंधला सा है कि क्या करें ?? कहाँ जाएँ ??  प्रदेश में युवाओं की बात करें तो अधिकांशतः की मनोदशा ऐसी है कि सरकारी नौकरी की सोते जागते बाट जोह रहे हैं और शैक्षणिक योग्यताएं बढ़ाने में लगे हैं कि 38 -40 की उम्र तक कहीं 15 - 17 हजार की सरकारी नौकरी मिल जाये तो अच्छा हो।  अब आते हैं आज के मूल विषय पर उद्यमिता या स्टार्टअप।  इससे पहले कि हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचें आइये समझते हैं कि एक उद्यमी और एक स्टार्टअप संस्थापक में क्या मूल अंतर है।  

उद्यमी उद्यमी एक ऐसा व्यक्ति होता है जो किसी भी प्रकार के व्यवसाय की तलाश करता है जिससे लाभ कमाया जा सके या उस व्यवसाय को और अधिक लाभदायक कैसे बनाया …
अपनी जानकारी और विधाओं को कभी भी कम करके  मत आंकिये 
सन १९९७८ - ९८ की बात होगी जब मैंने खाद्य प्रसंस्करण के सम्बन्ध में पढ़ना और उस पर सोचना शुरू किया तब मेरी बहुत सी बातों पर मित्र और परिवार वाले हंसा करते थे जैसे जब मैं कहता कि एक दिन लहसून और अदरक का पेस्ट मिलेगा जिसे जब मर्जी उपयोग में ला सकते हैं, ऐसे ही डिब्बा बंद सब्जियां, समोसे, बड़े और पराठे।  फिर समय बीत गया और हम सबने खाद्य प्रसंस्करण के अनेक स्वादिष्ट नमूने देखे। खाद्य प्रसंस्करण की तकनीक का हमारे देश और राज्य से बहुत पुराना नाता है  परन्तु पेशेवर और व्यावसायिक सोच की कमी के कारण हमने अपने धरोहरों को स्वान्तः सुखाय ही उपयोग किया वहीँ दूसरी और विदेशी कंपनियों ने हमारी सोच और जीवन शैली का अध्ययन कर खूब व्यवसाय किया फिर चाहे वो ईस्ट इंडिया कंपनी हो या फिर कोई और सभी बड़ी विदेशी कम्पनियों ने भारत को एक समृद्ध उपभोक्ता बाजार के रूप में देखा और व्यापार किया है।  हमारे देश में आज भी इतनी पुरातन तकनीक और बौद्धिक सम्पदा है कि व्यवस्थित और चरणबद्ध ढंग से कार्य करने पर देश से आधी बेरोजगारी तो यूँ ही मिट सकती है।  जरुरत है सिर्फ अवसर को …
सुचना शक्ति को पहचानें युवा
कहते हैं जंग की तैयारी वर्षों तक करनी पड़ती है ताकि वक्त आने पर कोई भी चूक न हो उसी प्रकार स्वरोजगार के लिए तैयारी हर युवा को हाई स्कूल परीक्षा पास करते ही शुरू कर देनी चाहिए। भविष्य की अपार संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अपनी युवा शक्ति के लिए विभिन्न  योजनाएं बनायीं हैं और अधिक से  को स्वरोजगार तथा रोजगार उपलब्ध करने के ध्येय से निरंतर प्रयास कर रही है। युवाओं को इसका अधिक से अधिक लाभ लेना चाहिए। प्रारम्भिक तैयारी के रूप में सरकार (केंद्र तथा राज्य) की योजनाओं के सम्बन्ध में नियमित रूप से अध्ययन करना चाहिए जिस से वक़्त आने पर अपनी जरुरी अर्हताओं एवं आवश्यकता के अनुसार विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाली वित्तीय सहायता के लिए आवेदन कर सकें।   एक सफल उद्यमी बनने के लिए कोई भी एक फार्मूला नहीं होता, इसके लिए हमें सतत प्रयास एवं तैयारी करनी पड़ती है। आमतौर पर यह देखा गया है कि युवाओं को आवश्यक अर्हताओं के बाद भी शासन की योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत पेश आती है जिसका प्रमुख कारण आवश्यक दस्तावेजों का अभाव होता है जैसे पैन कार्ड, आधार कार्ड, इनकम टैक्स…
समय तथा तनाव प्रबंधन वर्तमान समय में हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले दो मुख्य कारण हैं पहला तनाव तथा दूसरा समय का अकुशलतापूर्वक प्रबंधन। ये दोनों ही कारण एक दूसरे के पूरक हैं।  जब हम अपना कार्य तय समय सीमा में नहीं कर पाते तो तनाव उत्पन्न होता है और तनाव हमारे सोचने समझने की सहज क्षमता को प्रभावित करता है जिससे अनिर्णय की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और समय बीतते जाता है। दूसरे शब्दों में कहा जाय तो हम  सही समय पर अपनी प्राथमिकताएं तय नहीं कर पाते और वास्तविक लक्ष्य से भटक जाते हैं। हमारे आस पास न जाने कितने ऐसे लोग हैं जो बहुत से कार्य करने में सक्षम हैं तथा अपेक्षाकृत अधिक सफलता के साथ अपना  जीवन जी सकते हैं, परन्तु तात्कालिक सुविधा में उलझकर अथवा दूरदृष्टि न होने के कारण हताशा एवं असफलता के कुचक्र में फंसते चले जाते हैं।  ऐसी स्थिति में जब सभी धागे उलझ जाएँ तब शांति से बैठकर धैर्य के साथ अपनी प्राथमिकताएं तय करते हुए एक एक सिरे से समस्या की छोर पकड़ना ज्यादा आसान होता है और तभी आप उलझन को सुलझा सकते हैं।  बिना साहस गंवाए धीरज के साथ अपने बड़े लक्ष्य की ओर धीरे धीरे कदम बढ़ाना ही एकमात्र…
"Crowdfunding"
स्वरोजगार के लिए पूंजी की व्यवस्था  पिछले भाग में हमने अपने स्वरोजगार के चयन के लिए कुछ उपायों के बारे में चर्चा की थी।  आज हम स्वरोजगार स्थापित करने से पूर्व पूंजी की व्यवस्था पर चर्चा करेंगे।  सामान्य रूप से किसी भी व्यापार  व्यवसाय की योजना उसके आवश्यक लागत की चर्चा और चिंता से शुरू होती है।  कोई भी उद्यमी जब अपने व्यापार एवं व्यवसाय की परिकल्पना को आकार देने की सोचता है तब बहुत सारी  तकनीकि  समस्याएं मष्तिष्क में आने लगती है जैसे व्यापार की स्थापना के लिए एक अच्छी व्यापार योजना एवं प्रारूप, बाजार का शोध एवं विश्लेषण, उत्पाद का चयन, ग्राहक वर्ग का निर्धारण आदि। परन्तु इस सबसे ऊपर जो समस्या होती है वह होती है पूंजी की।  सामान्य रूप से व्यापार व्यवसाय की स्थापना के लिए अधिकांश लोग परंपरागत तरीके से ही पूंजी जुटाना चाहते हैं जैसे बैंक से व्यावसायिक लोन लेना या एंजेल इन्वेस्टर्स तथा वेंचर कैपिटल फर्म्स की मदद से पूंजी निवेश करना। इस तरह नए व्यापार में पूंजी लगाने के सीमित साधन हैं। इन सभी उपायों से इतर आज हम बात करेंगे "Crowdfunding " या जन सहयोग  की।�…