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उद्यमिता से बनायें विरासत गहन चिंतन, मनन और व्यक्तिगत वैचारिक शोध से कुछ बेहद निराशाजनक तथ्य सामने आये जिन्हे एक शब्द या वाक्य में बयान कर पाना संभव नहीं है।आज उद्यमिता एवं स्टार्टअप का शोर चारों दिशाओं में सुनाई दे रहा है, क्यों ?? क्यों बड़ी बड़ी कंपनियां इन पर जोर दे रही हैं ? मुझे ये लकीर पीटने जैसा प्रतीत होता है। इसको विस्तार से समझने के पूर्व"वर्तमान में निजी एवं शासकीय संस्थानों केकर्मचारियों में बढ़ रहे असंतोष, गुणवत्ताहीन कार्यों एवं भ्रष्टाचार की शिकायतों पर एक विश्लेषण जरुरी है"। कई नामचीन बड़ी कंपनियों और संस्थानों में शीर्षस्थ पदों पर आसीन संचालक तथानिर्णायक मंडल के आसपास बेहद मृदुभाषी एवं नटलालों का एक बेहद मजबूत सुरक्षा चक्र होता है।इनकी संख्या बहुत ही कम होती है परंतु परोक्ष रूप से पूरी संस्था का सञ्चालन इनके द्वारा ही होता है। प्रोटोकॉल के अभेद्य दीवार की आड़ में ये घोड़े से गधे के काम (गर्दभ प्रलाप ) की अपेक्षा रखते हैं और गधों को विकास की राह पर हो रही प्रतियोगिता के लिए तैयार करने का सतत प्रयास करते रहते हैं।नतीजतन अंधे के हाथ लगे बटेर यानि गर्दभ की कर्मठता को …
परिवर्तन से मिलते हैं उद्यमिता एवं नवाचार के अवसर कहते  हैं परिवर्तन ही शाश्वत है और जो समय के साथ नहीं बदलते वो पीछे रह जाते हैं। हर परिवर्तन किसी न किसी रूप में विनाश और फिर निर्माण लेकर आता है, यही चक्र अनंत काल से चल रहा है। जो इस परिवर्तन चक्र के मध्य चुनौतियों को पार कर संभावनाओं को पहचान लेते है वही इतिहास का निर्माण करते हैं। उद्यमिता के सन्दर्भ में भी प्राचीन काल से यही बात शाश्वत है "समय के परिवर्तन एवं मांग को ध्यान में रखते हुए अवसर का लाभ उठाना एवं नवाचार से समय के साथ आगे बढ़ना"।
हाल ही में राज्य में सत्ता परिवर्तन के पश्चात् प्रदेश के मुखिया (मुख्यमंत्री) द्वारा "छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी "नरुआ, गरुआ, घुरुआ, बारी"..   एला बचाना हे संगवारी का नारा दिया गया है। इस सारगर्भित नारे का संक्षिप्त विश्लेषण इस प्रकार है कि "मित्रों छत्तीसगढ़ प्रदेश की चार महत्वपूर्ण चिन्हारी अर्थात पहचान को हमें बचाना है जो कि नरुआ, गरुआ, घुरुआ और बारी हैं।"      नरुआ अर्थात नहरों एवं नालों से है जिनसे गॉंव के खेतों में सिंचाई की जाती थी, जो समय के साथ साथ सूख गए …
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"स्वरोजगार एवं महिलाएं"  "एक अनुमान (सरकारी आंकड़े नहीं हैं) के मुताबिक यदि 50 प्रतिशत ग्रामीण महिलाओं को रोजगार अथवा स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हों तो हमारे देश में गरीबी को २० से २५ प्रतिशत तक कम किया जा सकता है"।
केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा समय समय पर महिलाओं के सशक्तिकरण (रोजगार, स्वास्थ्य, सुरक्षा आदि ) के लिए विभिन्न योजनायें बनाई जाती हैं परन्तु आमतौर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जागरूकता के अभाव कारण महिलाओं को इन योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पता। हमारा प्रयास है कि सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक ऐसे अवसरों की जानकारी पहुचायें जिससे अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके। इसी श्रृंखला में महिलाओं के लिए ई- रिक्शा संचालन हेतु "छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल द्वारा संचालित मुख्यमंत्री ई - रिक्शा सहायता  योजना" के सम्बन्ध में  संक्षिप्त जानकारी लेख के अंत में संलग्न है। 
"वर्तमान में महिलाएं (विश्व भर में) सभी क्षेत्रों में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं और कुछ जगहों पर (समाज के कुछ हिस्स…
भारतीय उद्योग एवं व्यापार में कौशल अंतराल (SKILL GAP): एक विश्लेषण   


भारतीय औद्योगिक परिदृश्य में हमेशा से तकनिकी कुशल एवं दक्ष मानव संसाधनों की कमी रही है। भारतीय निर्माण क्षेत्र में यह स्किल गैप एक तरह की राष्ट्रीय समस्या  बन गया है जिसे ख़त्म करना अथवा इसके अंतर को कम करना राष्ट्रीय  प्राथमिकता बन गया है। इस स्किल गैप का सबसे ज्यादा खामियाजा  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है।  एक ओर जहाँ कुछउद्योगवास्तविक स्किल गैप (कौशलअंतराल ) से जूझ रहे हैं वहीँ अन्य उद्योगवाणिज्यिककठिनाइयोंसेपीड़ितहैं जिन्हेंकौशलविकासकार्यक्रमोंकेअलावाअन्यनीतियोंकेमाध्यमसेबेहतरढंगसेसंयोजित कियाजासकता है। कहने का तात्पर्य यह है किभारतके स्किल गैप (कौशलअंतराल)परसार्वजनिकबहस की आवश्यकता है जिससे इस सन्दर्भ में नीति बनाई जा सके। भारतमें स्किल गैप (कौशलअंतराल) को कम करने या ख़त्म करनेके लिए सरकार तथा शीर्ष औद्योगिक संगठनों द्वारा समय समय पर काफीकुछप्रयास किया जाता रहा है जिनमें जागरूकता कार्यक्रम, स्किल गैप एनालिसिस सर्वे, तकनिकी कौशल विकास कार्यक्रम आदि हैं  इस दौरान सरकारऔरकुछउद्योग संगठनों नेयह पा…
उद्यमिता बनाम स्टार्टअप

आज जब देश में स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया का माहौल है युवाओं के समक्ष एक दुविधा सी है उद्यमिता या स्टार्टअप।  एक ओर उद्यमिता विकास कार्यक्रम जोरों पर है, स्वरोजगार स्थापना के लिए सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं दूसरी ओर स्टार्टअप आइडियाज के लिए सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।  शिक्षित एवं बेरोजगार युवाओं के सामने कुछ धुंधला सा है कि क्या करें ?? कहाँ जाएँ ??  प्रदेश में युवाओं की बात करें तो अधिकांशतः की मनोदशा ऐसी है कि सरकारी नौकरी की सोते जागते बाट जोह रहे हैं और शैक्षणिक योग्यताएं बढ़ाने में लगे हैं कि 38 -40 की उम्र तक कहीं 15 - 17 हजार की सरकारी नौकरी मिल जाये तो अच्छा हो।  अब आते हैं आज के मूल विषय पर उद्यमिता या स्टार्टअप।  इससे पहले कि हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचें आइये समझते हैं कि एक उद्यमी और एक स्टार्टअप संस्थापक में क्या मूल अंतर है।  

उद्यमी उद्यमी एक ऐसा व्यक्ति होता है जो किसी भी प्रकार के व्यवसाय की तलाश करता है जिससे लाभ कमाया जा सके या उस व्यवसाय को और अधिक लाभदायक कैसे बनाया …
अपनी जानकारी और विधाओं को कभी भी कम करके  मत आंकिये 
सन १९९७८ - ९८ की बात होगी जब मैंने खाद्य प्रसंस्करण के सम्बन्ध में पढ़ना और उस पर सोचना शुरू किया तब मेरी बहुत सी बातों पर मित्र और परिवार वाले हंसा करते थे जैसे जब मैं कहता कि एक दिन लहसून और अदरक का पेस्ट मिलेगा जिसे जब मर्जी उपयोग में ला सकते हैं, ऐसे ही डिब्बा बंद सब्जियां, समोसे, बड़े और पराठे।  फिर समय बीत गया और हम सबने खाद्य प्रसंस्करण के अनेक स्वादिष्ट नमूने देखे। खाद्य प्रसंस्करण की तकनीक का हमारे देश और राज्य से बहुत पुराना नाता है  परन्तु पेशेवर और व्यावसायिक सोच की कमी के कारण हमने अपने धरोहरों को स्वान्तः सुखाय ही उपयोग किया वहीँ दूसरी और विदेशी कंपनियों ने हमारी सोच और जीवन शैली का अध्ययन कर खूब व्यवसाय किया फिर चाहे वो ईस्ट इंडिया कंपनी हो या फिर कोई और सभी बड़ी विदेशी कम्पनियों ने भारत को एक समृद्ध उपभोक्ता बाजार के रूप में देखा और व्यापार किया है।  हमारे देश में आज भी इतनी पुरातन तकनीक और बौद्धिक सम्पदा है कि व्यवस्थित और चरणबद्ध ढंग से कार्य करने पर देश से आधी बेरोजगारी तो यूँ ही मिट सकती है।  जरुरत है सिर्फ अवसर को …
सुचना शक्ति को पहचानें युवा
कहते हैं जंग की तैयारी वर्षों तक करनी पड़ती है ताकि वक्त आने पर कोई भी चूक न हो उसी प्रकार स्वरोजगार के लिए तैयारी हर युवा को हाई स्कूल परीक्षा पास करते ही शुरू कर देनी चाहिए। भविष्य की अपार संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अपनी युवा शक्ति के लिए विभिन्न  योजनाएं बनायीं हैं और अधिक से  को स्वरोजगार तथा रोजगार उपलब्ध करने के ध्येय से निरंतर प्रयास कर रही है। युवाओं को इसका अधिक से अधिक लाभ लेना चाहिए। प्रारम्भिक तैयारी के रूप में सरकार (केंद्र तथा राज्य) की योजनाओं के सम्बन्ध में नियमित रूप से अध्ययन करना चाहिए जिस से वक़्त आने पर अपनी जरुरी अर्हताओं एवं आवश्यकता के अनुसार विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाली वित्तीय सहायता के लिए आवेदन कर सकें।   एक सफल उद्यमी बनने के लिए कोई भी एक फार्मूला नहीं होता, इसके लिए हमें सतत प्रयास एवं तैयारी करनी पड़ती है। आमतौर पर यह देखा गया है कि युवाओं को आवश्यक अर्हताओं के बाद भी शासन की योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत पेश आती है जिसका प्रमुख कारण आवश्यक दस्तावेजों का अभाव होता है जैसे पैन कार्ड, आधार कार्ड, इनकम टैक्स…